विरासत: अमृतसर के वो ऐतिहासिक दरवाज़े, जो आज भी इतिहास की गवाही देते हैं

लेखक: जे.डी. विरदी अमृतसर, जिसे हम सिफ़्त का घर और गुरु की नगरी कहते हैं, सिर्फ अपनी रूहानियत और ज़ायके के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक किलाबंदी के लिए भी दुनिया भर में मशहूर है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमृतसर का असली वजूद उन 12 दरवाज़ों में छिपा है, जो कभी इस … Read more

हमसाया: पाकिस्तान का शाकाहारी स्वाद और हमारी साझा पाक विरासत

✍️लेखक: सुनील दत्त पाकिस्तान उन सभी मुस्लिम देशों में से एक मात्र ऐसा मुस्लिम देश है जहाँ शाकाहारी भोजन की विविधता और लोकप्रियता अपेक्षाकृत अधिक दिखाई देती है। पाकिस्तान का भोजन सामान्यतः मांसाहारी व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध माना जाता है, किंतु वास्तविकता यह है कि वहाँ की भोजन संस्कृति में शाकाहारी व्यंजनों की भी एक … Read more

हरित चेतना की विरासत और आज की आवश्यकता, श्री गुरु हर राय जी की दृष्टि से पर्यावरणीय पुनर्जागरण

✍️लेखक: सुनील दत्त, पूर्व डायरेक्टर, पंजाबी साहित्य अकादमी जब विश्व जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता के ह्रास और जल-संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब केवल वैज्ञानिक या तकनीकी समाधान पर्याप्त नहीं हैं। हमें एक नैतिक और आध्यात्मिक दृष्टि की भी आवश्यकता है, जो मनुष्य और प्रकृति के संबंध को पुनर्स्थापित कर सके। सिख … Read more

विश्वबंधुत्व की ओर सेतु: यहूदी परंपरा, उदारवादी चिंतन और संवाद की साझा राह

वर्तमान संदर्भों में ग्लोबल साउथ या दक्षिण एशिया के चिंतकों के लिए यह और भी आवश्यक हो गया है कि हम यहूदियों को और गहनता से Decode करें ! ✍️लेखक: सुनील दत्त, पूर्व डायरेक्टर, पंजाबी साहित्य अकादमी जब भी विश्व राजनीति में इज़राइल, फ़िलिस्तीन या पश्चिम एशिया की चर्चा होती है, तो “ज़ायोनिस्ट” और “यहूदी” … Read more

गणतंत्र दिवस के मौके पर कश्मीर घाटी में बहुआयामी संस्कृति की नई शुरुआत

✍️Lieutenant. Preeti Mohan कश्मीर घाटी के कुपवाड़ा जिले में गणतंत्र दिवस के मोके पर पहली बार घाटी की बहुआयामी संस्कृति की झलक देखने को मिली। आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर हिन्दको बोली में एक गीत प्रस्तुत किया गया।  कुपवाड़ा के करनाहा और टंगधार क्षेत्रों में लगभग छह लाख लोग हिन्दको बोली बोलते हैं, जो … Read more

भाई लखी शाह वंजारा: सच्चे गुरसिख, दूरदृष्टा व्यापारी और साझा संस्कृति के सेतु

 भाई लखी शाह वंजारा सत्रवी 17 वीं शताब्दी के समय सिल्क और स्पाइस रूट के सबसे बड़े और सफल लोजेस्टिक इम्पायर के मालिक थे ✍️लेखक: सुनील दत्त, पूर्व डायरेक्टर, पंजाबी साहित्य अकादमी भाई लखी शाह वंजारा जिन्हें धन धन श्री गुरू तेग बहादुर जी के पार्थिव शरीर को दुश्मनों से छीनकर पूरे सम्मान के साथ … Read more

भीड़ से दूर, सुकून के करीब: पुराने गीतों के साथ कश्मीर में नया साल

✍️Lieutenant. Preeti Mohan नये साल के स्वागत को लेकर कश्मीर घाटी में बीते कुछ वर्षों से एक ख़ास सांस्कृतिक रंग देखने को मिल रहा है। घाटी के अधिकतर रेस्टोरेंट और कैफ़े अब लाइव म्यूजिक और न्यू ईयर पार्टीज़ का आयोजन करने लगे हैं, जो पहले के मुकाबले एक नया और खुला माहौल दर्शाता है। इन … Read more

Gurpurab Celebrated at LoC Teetwal — The Northernmost Gurudwara of India Illuminates with Devotion

Teetwal, Kashmir — The sacred occasion of Gurpurab, marking the birth anniversary of Guru Nanak Dev Ji, was celebrated with great devotion and joy today at Guru Teg Bahadur Gurudwara, located on the Line of Control (LoC) in Teetwal, North Kashmir. This historic site — known as the last Gurudwara of India on the northern … Read more

The Namghar tradition of Srimanta Sankardev of Assam became a symbol of Hindu-Muslim brotherhood.

✍️Author: Sunil Dutt, Former Director, Punjabi Sahitya Academy, Haryana In the 15th century, Assam was struggling with superstition, caste discrimination, and religious divisions. During this period, a visionary saint guided society towards love and equality — he was Srimanta Sankardeva. Sankardeva stands among India’s greatest saints, poets, and reformers who transformed religion into a synonym … Read more

असम के श्रीमान्त शंकरदेव की नामघर परम्परा बनी हिन्दू मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक

✍️लेखक: सुनील दत्त, पूर्व डायरेक्टर, पंजाबी साहित्य अकादमी, हरियाणा 15वीं शताब्दी का असम अंधविश्वास, जातिवाद और धार्मिक अलगाव से जूझ रहा था। ऐसे समय में एक साधक ने समाज को प्रेम और समानता की दिशा दिखाई — वही थे श्रीमान्त शंकरदेव। श्रीमान्त शंकरदेव जी भारतीय इतिहास के उन महान संत, कवि-सुधारक और धर्मद्रष्टाओं में से … Read more