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भीड़ से दूर, सुकून के करीब: पुराने गीतों के साथ कश्मीर में नया साल

पुराने गीतों की धुन पर नया साल: कश्मीर की अनोखी शामें

✍️Lieutenant. Preeti Mohan

नये साल के स्वागत को लेकर कश्मीर घाटी में बीते कुछ वर्षों से एक ख़ास सांस्कृतिक रंग देखने को मिल रहा है। घाटी के अधिकतर रेस्टोरेंट और कैफ़े अब लाइव म्यूजिक और न्यू ईयर पार्टीज़ का आयोजन करने लगे हैं, जो पहले के मुकाबले एक नया और खुला माहौल दर्शाता है। इन आयोजनों में स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि पर्यटक भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।

कश्मीर की एक अनोखी विशेषता यह है कि यहाँ के लोगों का संगीत से रिश्ता आज भी बेहद गहरा और संवेदनशील है। खास तौर पर सत्तर और अस्सी के दशक के पुराने गीतों के प्रति यहाँ की दीवानगी आज भी बरकरार है। इन गीतों की धुनें, बोल और भावनाएँ घाटी के लोगों के दिलों में आज भी उसी तरह बसती हैं, जैसे दशकों पहले बसती थीं।

दिलचस्प बात यह है कि यह लगाव केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं है। घाटी की नई पीढ़ी भी पुराने गीतों को उतने ही शौक और अपनापन के साथ सुनती है। जहाँ भारत के अन्य राज्यों में इस तरह की सामूहिक रुचि अब कम देखने को मिलती है, वहीं कश्मीर में पुराने गीत आज भी पीढ़ियों को जोड़ने का काम कर रहे हैं।

नये साल की ये संगीत भरी शामें कश्मीर को एक अलग ही पहचान देती हैं। बर्फ़ से ढकी वादियों, रोशनी से सजे कैफ़े और पुराने गीतों की मधुर धुनों के बीच नये साल का स्वागत करना पर्यटकों के लिए एक यादगार अनुभव बन सकता है। जो लोग शोरगुल भरी पार्टियों से हटकर सुकून, संस्कृति और संगीत का संगम देखना चाहते हैं, उनके लिए कश्मीर नये साल का जश्न मनाने की एक बेहद आकर्षक और अनोखी मंज़िल बनता जा रहा है।

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