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गिलगित-बाल्टिस्तान: ज़मीनी हक़ और मानवाधिकारों के लिए उठती आवाज़ें

गिलगित-बाल्टिस्तान: ज़मीनी हक़ और मानवाधिकारों के लिए उठती आवाज़ें

✍️Lieutenant. Preeti Mohan

पाकिस्तान के गैरक़ानूनी प्रशासनिक नियंत्रण वाले क्षेत्र गिलगित-बाल्टिस्तान में हाल ही में ज़बरदस्त जनआंदोलन देखने को मिला है। कारण है – मानवाधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वाले Advocate एहसान अली और Awami Action Committee (AAC) के अन्य कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी। इन्हें राजद्रोह और घृणा फैलाने जैसे गंभीर आरोपों में गिरफ़्तार किया गया है। लेकिन स्थानीय लोग इसे एक साज़िश मानते हैं, ताकि AAC द्वारा विवादास्पद भूमि सुधार कानून (Land Reforms Bill) के खिलाफ चल रहे विरोध को दबाया जा सके।

आंदोलन की हालिया तस्वीर और बढ़ता विरोध

बीते सप्ताह गिलगित, स्कर्दू और हुंजा जैसे क्षेत्रों में AAC के आह्वान पर पूर्ण हड़ताल देखी गई। एहसान अली, इंजीनियर महबूब वाली, मसूदुर रहमान सहित अन्य नेताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए। Awami Workers Party (AWP) और Human Rights Commission of Pakistan (HRCP) ने भी इन गिरफ्तारियों की निंदा करते हुए तत्काल रिहाई की मांग की।

छात्रों ने भी कराची में विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें उन्हें सुरक्षा बलों द्वारा ज़बरदस्ती रोका गया और कई छात्रों को गिरफ़्तार भी किया गया। यह सिर्फ एक संगठन की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आवाज़ है, जो दशकों से अधिकारों से वंचित है।

गिलगित-बाल्टिस्तान: ज़मीनी हक़ और मानवाधिकारों के लिए उठती आवाज़ें

आज़ादी की मांग और दोहन का आरोप

गिलगित-बाल्टिस्तान के निवासियों का कहना है कि वे अब भी बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं। जब वे पीने के पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग करते हैं, तो उन पर आतंकवाद निरोधक कानून थोप दिए जाते हैं। जिक्रयोग है की पाकिस्तान के पंजाबी मुस्लिम पूरे क्षेत्र के संसाधनों का दोहन कर रहे है, जबकि स्थानीय जनता को उनके हक़ से वंचित रखा गया है।

एक नागरिक ने कहा:

“Awami Action Committee हमारे लिए काम करती रही है। उनके नेता हमारी आवाज़ हैं। उनकी बस यही गलती है कि वे हमारे अधिकारों के लिए बोले।”

गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग पूछते हैं:

“अगर सरकार हमारी ज़मीनें छीन लेगी, तो हमारे पास क्या बचेगा? हमारी मातृभूमि को बचाना हमारी ज़िम्मेदारी है। हम सबको एकजुट होना होगा।”

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पाकिस्तान के अन्य क्षेत्रों में भी असंतोष

गिलगित-बाल्टिस्तान ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों में भी जनता ने सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। सेना और विदेशी कंपनियों (चीन) के गठजोड़ पर आरोप लग रहे हैं कि ये स्थानीय संसाधनों को छीनने की साजिश में शामिल हैं।

मानवाधिकारों का हनन और जनजागृति की पुकार

HRCP ने स्पष्ट कहा है कि AAC नेताओं की गिरफ्तारी अवैध, अन्यायपूर्ण और मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।

गिलगित-बाल्टिस्तान में उठ रही ये आवाज़ें सिर्फ एक कानून या संगठन के खिलाफ नहीं हैं – ये पूरे सिस्टम के खिलाफ एक संघर्ष हैं, जो लोगों को हाशिए पर रखता आया है। अब समय है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन आवाज़ों को सुने और अवैध कब्ज़े वाले इस क्षेत्र में इंसाफ़ की बहाली हो।

वीडियो देखें:

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