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महिला सशक्तिकरण से बदल रही है कश्मीर की झलक; टूरिज्म से लेकर हर क्षेत्र में बढ़ा योगदान

✍️ Lieutenant. Preeti Mohan

26 जनवरी 2024 को 75वें गणतंत्र दिवस समारोह दौरान कर्तव्य पथ पर हुई परेड के साथ भारत ने अपनी बढ़ती सैन्य ताकत और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के भव्य प्रदर्शन के साथ जश्न मनाया। देश की महिला शक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों पर केंद्रित इस भव्य समारोह में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। परेड में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 16 झांकियां और 9 झांकियां मंत्रालयों/विभागों की शामिल हुई। 

महिला सशक्तिकरण से बदल रही है कश्मीर की झलक; टूरिज्म से लेकर हर क्षेत्र में बढ़ा योगदान

समारोह महिला सशक्तीकरण पर रहा केंद्रित  

साल 2024 का गणतंत्र दिवस का समारोह पूरी तरह ‘महिला सशक्तीकरण’ पर केंद्रित रहा। जिनमें सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भूमिका से लेकर महिला वैज्ञानिकों के योगदान की झलक देखने को मिली। इन झाँकियों में विभिन्न राज्यों में सक्रिय महिला स्वयं सहायता समूहों, पर्यटन उद्योग में महिलाओं के योगदान और सहकारी सोसाइटी में महिलाओं द्वारा लाई गई क्रांति को दर्शाया गया था। 

कश्मीर में लैवेंडर की खेती पर आधारित झांकी रहीं खास 

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की गणतंत्र दिवस की झांकी ने जम्मू और कश्मीर में लैवेंडर की खेती के माध्यम से शुरू हुई बैंगनी क्रांति की शुरुआत पर प्रकाश डाला है। सीएसआईआर के वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के कारण लैवेंडर की खेती में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है और प्रयोगशाला से बाजार तक लैवेंडर उत्पादों का विकास होने के साथ ही जम्मू-कश्मीर में कई कृषि-स्टार्ट-अप्स का निर्माण हुआ है। झांकी में सीएसआईआर द्वारा विकसित भारत के पहले महिला अनुकूल, कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर का भी प्रदर्शन किया गया। झांकी में लैवेंडर की प्रचुर खेती और जम्मू-कश्मीर की 21वीं सदी की एक सशक्त महिला किसान की मूर्ति को प्रदर्शित किया गया था।  

कश्मीर के विकास में बढ़ रहा है कश्मीरी महिलाओं का योगदान:-

कश्मीर की महिलाएं विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपने, अपने परिवार और कश्मीर के विकास में योगदान दे रही हैं। महिलाओं ने कश्मीर के आर्थिक, सामाजिक विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी । कश्मीर में अब कई महिला स्वयं सहायता समूह (सेल्फहेल्प ग्रुप्स) सक्रिय हैं। होम स्टे इंडस्ट्री में महिलाएं अच्छा काम कर रही है। पर्यटन उद्योग (टूरिज्म इंडस्ट्री) में भी इनका योगदान काफ़ी बढ़ा है। कश्मीरी महिलाओं ने स्वयं सहायता समूहों (सेल्फहेल्प ग्रुप्स) के माध्यम से कृषि क्षेत्र में कई कृषि-स्टार्ट-अप भी शुरू की हैं। बैंगनी क्रांति (पर्पल रिवोल्यूशन) के अंतर्गत कश्मीरी महिलाओं ने लैवेंडर-आधारित उत्पादों (इत्र, तेल, अगरबत्ती) और लैवेंडर फूलों से आवश्यक तेल निकालने के स्टार्ट-अप भी शुरू किये है। तकनीकी क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ रही है। सरकार की तरफ़ से भी कौशल विकास का प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर जुटाने में भी मदद की जा रही है। कश्मीर में महिला सशक्तीकरण होने से कश्मीरी समाज एक मजबूत समाज बनने के ओर अग्रेसर है।  

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