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गिलगित-बाल्टिस्तान में 22 घण्टे बिजली का कट; मात्र दो घंटे की बिजली से परेशान लोग

गिलगित-बाल्टिस्तान में 22 घण्टे बिजली का कट; मात्र दो घंटे की बिजली से परेशान लोग

✍️ Lieutenant. Preeti Mohan  

गिलगित-बाल्टिस्तान, जो अपनी नैसर्गिक सुंदरता और बर्फीली पहाड़ों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, असल में बुनियादी सुविधाओं से वंचित और लगातार संकट में जीने वाला क्षेत्र है। यह क्षेत्र, जो पाकिस्तान के प्रशासन के अधीन है, यहां के लोगों के लिए एक ऐसी जगह बन गया है जहां 77 सालों से बुनियादी अधिकारों की लड़ाई जारी है।

बिजली संकट और सर्दियों की तबाही

सर्दियों के मौसम में, गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग 20 से 22 घंटे तक बिजली कटौती का सामना करते हैं। इस भीषण बिजली संकट ने न केवल यहां की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है, बल्कि लोगों की दिनचर्या को भी अस्त-व्यस्त कर दिया है। ठंड के दौरान, जब तापमान शून्य से नीचे चला जाता है, बिजली की अनुपलब्धता से लोग हीटर तक नहीं चला पाते। स्कूल, अस्पताल और छोटे व्यवसाय भी इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हैं।

पहाड़ी जीवन की कठिनाइयाँ

एक पहाड़ी समुदाय होने के कारण गिलगित-बाल्टिस्तान की चुनौतियाँ पहले से ही अधिक थीं। खराब सड़कों, सीमित परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी जैसी समस्याएँ यहाँ के लोगों की जिंदगी को और कठिन बना देती हैं। पाकिस्तान की सत्ता के अधीन के कारण, यह क्षेत्र सरकार से बुनियादी सुविधाएँ तक हासिल करने में असमर्थ रहा है।

आवाज़ उठाने का समय

अब समय आ गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग अपनी आवाज़ बुलंद करें और अपने अधिकारों की मांग करें। यहां के युवा बेहद मेहनती और जुझारू हैं। वे इन समस्याओं के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रहे हैं। हाल के दिनों में युवाओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

युवाओं का संघर्ष

गिलगित-बाल्टिस्तान की एक युवती की एक भावुक वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। इस वीडियो में उसने यहां के लोगों की दुर्दशा को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया है और बाहरी दुनिया से अपील की है कि वे गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों की स्थिति को समझें और उनके अधिकारों के लिए समर्थन करें।

नतीजा

गिलगित-बाल्टिस्तान, जो अपनी खूबसूरती के कारण हर किसी को आकर्षित करता है, असल में संकटों का घर है। इस क्षेत्र के लोग बुनियादी ज़रूरतों और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह समय है कि न केवल यहां के लोग, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इस मुद्दे पर ध्यान दें और इस क्षेत्र को बुनियादी सुविधाओं और सम्मानजनक जीवन जीने का हक दिलाने में मदद करें।

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