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31 मार्च – पुण्यतिथि – आइज़क न्यूटन #IsaacNewton #Newton #Todayinhistory

****आइज़क न्यूटन****

(31 मार्च 1727 – पुण्यतिथि – आइज़क न्यूटन)

31 मार्च - पुण्यतिथि - आइज़क न्यूटन #IsaacNewton #Newton #Todayinhistory

कोई भी खोज एक बड़ी सोच के बिना नहीं की जा सकती ऐसा कहना है दुनिया को गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत देने वाले महान वैज्ञानिक आइज़क न्यूटन का। जिन्होंने अपनी सोच के दम पर इस विश्व को ऐसे वैज्ञानिक सिद्धांत दिए जिसके बिना हम विज्ञान के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं। न्यूटन ने लॉ ऑफ ग्रेविटी यानी गुरुत्वाकर्षण बल की खोज की थी। उन्होंने बताया कि गुरुत्वाकर्षण बल नाम की एक शक्ति है जो हर चीज को अपनी तरफ खींचती है और इसी बल की वजह से चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है और पृथ्वी सूर्य का। इसके अलावा न्यूटन की गति के तीन नियम लॉ ऑफ मोशन फिजिक्स में सबसे ज्यादा प्रयोग किए जाते हैं। 

सर आइज़क न्यूटन का जन्म 4 जनवरी 1643 को एक गरीब परिवार में हुआ था। उन्हें पिता का प्यार नहीं मिला था क्योकि उनके जन्म से पहले ही पिता की मौत हो गई थी। वह सिर्फ़ 3 साल के थे तो उनकी मां ने दोबारा शादी कर ली थी। लेकिन नए पिता को न्यूटन बिल्कुल भी पसंद नहीं था। इसीलिए उनकी मां ने उन्हें उनके दादा-दादी के पास छोड़ दिया और अपने पति के साथ में रहने लगी। बचपन में सभी उन्हें पागल ही बोलते थे। वह हमेशा सोचते रहते थे और अपने दादा दादी से बहुत सवाल पूछते थे। लेकिन उनके दादा-दादी उनके सवालों का जवाब नहीं दे पाते थे। 12 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल जाना स्टार्ट किया और वह पढ़ने में बिल्कुल भी अच्छे नहीं हुआ करते थे। और उनकी पढ़ाई में कमजोर होने की वजह से सभी उनका मजाक उड़ाते थे। इस बात को लेकर एक दिन उनका क्लास के एक लड़के के साथ झगड़ा हो जाता है जिसकी वजह से उन्हें स्कूल से भी निकाल दिया गया और फिर से अपनी मां के पास आ गए, क्योकि अब तक नए पिता की भी मौत हो चुकी थी।  

अब उनके घर चलाने में बहुत मुश्किल हो रहा था इसीलिए उनकी मां चाहती थी अब खेती कर ले लेकिन न्यूटन का मन खेती में बिल्कुल भी नहीं लगता था। इसीलिए स्कूल के प्रिंसिपल से बात करके उन्हें फिर से स्कूल भेजना शुरू कर दिया।  

लेकिन इस बार न्यूटन ने उस स्टूडेंट से बदला लेने की सोच ली, जिसकी वजह से वह स्कूल से निकाले गए थे। और पूरी शिद्दत के साथ पढ़ाई करने लगे और जल्दी स्कूल के टॉपर्स में गिने जाने लगे। उसके बाद 1661 में उन्हें अपने एक अंकल के माध्यम से ट्रिनिटी कॉलेज कैंब्रिज में एडमिशन मिल गया। वहां वह अपनी फीस भरने और खुद के खर्चों को चलाने के लिए कॉलेज के अमीर स्टूडेंट के वहां काम करते थे। इसी बीच 1664 में उन्हें अपनी कॉलेज से स्कॉलरशिप मिली। जिसकी वजह से वह अपनी पढ़ाई और रिसर्च पर ज्यादा ध्यान देने लगे। और फिर कॉलेज में ही 1665 में उन्होंने कुछ मैथमेटिकल लॉ का खोज किया जिसे बाद में कैलकुलस का नाम दिया गया। 1665 में ही उन्होंने BA की पढ़ाई पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए MA में एडमिशन लेने की सोची। लेकिन एडमिशन के समय अचानक लंदन में प्लेग की बीमारी फैल गई। जिससे शहर को कुछ महीनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया था। और इसीलिए वह अपनी मां के पास वापस आ गए और घर पर ही अगले 2 सालों तक लॉ ऑफ मोशन और ऑफ ग्रेविटी सिद्धांतों पर काम करना शुरू किया। 

कुछ सालों की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने सफलता मिल गई और उन्हों दुनिया को दिखा दिया कि एक पागल और गुस्से खोर लड़का चाहे तो कुछ भी कर सकता है। अपने सिद्वान्तों से दुनिया को बदलने के बाद 31 मार्च 1727 को लंदन में न्यूटन की मृत्यु हो गई। 

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