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13 मार्च – जलियांवाला हत्याकांड का बदला

****जलियांवाला हत्याकांड का बदला****

(13 मार्च 1940)

13 मार्च - जलियांवाला हत्याकांड का बदला
शहीदे आजम सरदार उधम सिंह

आज से 83 साल पहले यानि कि 13 मार्च 1940 को लंदन के कॉक्सटन हॉल में एक बैठक चल रही थी। इस बैठक में एक अंग्रेज अफसर जनरल माइकल ओ डायर आया हुआ था और तभी एक क्रांतिकारी युवक ने खड़े होकर उस अंग्रेज अफसर पर गोलियों की बरसात कर दी। उस डायर नामक अफसर की मौके पर ही मौत हो गई। यह गोलियां चलाने वाला क्रांतिकारी युवक कोई और नहीं ‘शहीदे आजम सरदार उधम सिंह’ था। 

13 अप्रैल 1919 को बैसाखी वाले दिन हजारों भारतीयों द्वारा जलियांवाला बाग अमृतसर में एक सभा की जा रही थी। यह सभा ब्रिटिश सरकार द्वारा काला कानून – ‘रोलट एक्ट’ पास करने के विरोध में चल रही थी। तभी जनरल डायर नामक अफ़सर की अगुवाई में एक ब्रिटिश फौज का काफिला वहां पहुंचता है और शांति से सभा कर रहे लोगों पर गोलियां चलाने लगता है। इस गोलीकांड में हज़ारो लोगों ने अपनी जान निशावर कर दी और कई सौ लोग घायल हुए। इसमें महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग सभी शामिल थे। कई लोगों ने अंग्रेज की गोली से मरने की बजाय, वहां बने एक कुएं में छलांग लगा दी।
इस भयानक नरसंहार ने उधम सिंह के मन में ब्रिटिश सरकार के लिए पल रहे गुस्से को अंतिम सीमा तक पहुंचा दिया। इसलिए उधम सिंह ने अपने जीवन का आखरी मकसद, इस नरसंहार का बदला लेना ही बना लिया था। तभी तो 13 मार्च 1940 को लंदन के ‘कॉक्सटन हॉल’ में चल रही बैठक में शामिल हो कर, जलियांवाला हत्याकांड के समय पंजाब का लेफ्टिनेंट गवर्नर जनरल ‘माइकल ओ डायर’ को मौत के घाट उतार कर इस हत्याकांड का बदला लिया। और वहीं पर अपनी गिरफ्तारी दे दी और 31 जुलाई 1940 को उधम सिंह को फांसी दे दी। 

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