आत्मघात: वेदप्रकाश लाम्बा
✍️ वेदप्रकाश लांबा ९४६६०-१७३१२ माँ दुखी हैं। माँ बहुत दुखी है। सीलन और दुर्गंध माँ के कक्ष में पसरी पड़ी हैं। पवन सहमी-सहमी सी उस कक्ष में आती तो है, परंतु लौट नहीं पाती। उस कक्ष से बाहर निकलने का कोई छिद्र, कोई मोखा अथवा कोई वातायन है ही नहीं। माँ की स्मृति में सूरज … Read more