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बैसाखी का त्योहार राष्ट्रीय एकता पर्व का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है

✍️ Lieutenant. Preeti Mohan 

भारत अनेकता में एकता का सर्वोत्तम उदाहरण है, जो हजारों वर्षों से पूरे विश्व को एकता का संदेश देता आ रहा है। भारत सिर्फ एक शब्द नहीं बल्कि हर भारतीय की आत्मा है जो उन्हें एकता के सूत्र में बांधता है। भारतीयों को ऐकता के सूत्र में बांधने में यहाँ के राष्ट्रीय स्तर मनाये जाने पर्वों का अहम योगदान है। ऐसा ही एक राष्ट्रीय पर्व है ‘बैसाखी’।  

बैसाखी का पावन दिन, महज धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि देश की एकता और अखंडता का प्रतीक है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने इसी तिथि को खालसा पंथ की स्थापना की थी, ताकि एक मजबूत राष्ट्र की परिकल्पना साकार हो। 

बैसाखी का त्योहार राष्ट्रीय एकता पर्व का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है

13 अप्रैल 1699 को बैसाखी वाले दिन देशभर में फैले लोगों का एक विशाल जन सम्मेलन आनंदपुर साहिब में बुलाया। उसमें एक कड़ी परीक्षा द्वारा पांच व्यक्तियों का चयन किया गया। इनमें एक पंजाब, एक उत्तर प्रदेश, एक गुजरात, एक ओड़िशा और एक कर्नाटक का था। ये पंच प्यारे थे भाई दया राम (लाहौर), भाई धर्मचंद (दिल्ली), भाई मुहकम चंद (द्वारका), भाई हिम्मत राम (जगन्नाथपुरी), भाई साहब चंद (बिदर)।  

स्वामी विवेकानंद ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का स्मरण भारत माता के सर्वश्रेष्ठ सपूत के रूप में करते हुए कहा है कि उन्होंने भारत माता की बलिबेदी पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। खालसा पंथ साजना के पीछे श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का स्पष्ट विचार था कि इस विशाल जन समाज को राष्ट्रीय सूत्र में तब तक नहीं बांधा जा सकता, जब तक कि राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को ही उनका धर्म न बना दिया जाये। 

इसलिए बैसाखी का पर्व किसी खास पंथ यां प्रांत का ना होकर एक राष्ट्रय पर्व है।

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