स्वतंत्रता के बाद घाटी में हुआ प्रथम बार वैदिक संगोष्ठी का आयोजन
कश्मीर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग तथा महर्षि संदिपनी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान उज्जैन द्वारा ‘आधुनिक युग में वेद की प्रासंगिताका’ विषय पर त्रिदिवसीय अखिल भारतीय वैदिक संगोष्ठी का आयोजन कश्मीर विश्वविद्यालय के गांधी भवन में किया गया। उद्घाटन सत्र में कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. फारुक अहमद मसूदी जी ने की, इनके साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में कुलसचिव डॉ निसार अहमद मीर, सारस्वत अतिथि महर्षि संदिपनी के उपाध्यक्ष प्रो. प्रफुल्ल कुमार मिश्र, बीज बिंदु वक्ता प्रो. राजेश्वर मिश्र, संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मेराज अहमद, संगोष्ठी के संयोजक डॉ. करतार चन्द शर्मा तथा विविध क्षेत्रों से आए हुए वैदिक विद्वतजन एवं विश्वविद्यालय के समस्त विभागों के अध्यापक, छात्र तथा शोधछात्र उपस्थित रहे।
अथितियों का स्वागत डॉ. मेराज अहमद ने किया। डॉ. करतार चन्द शर्मा जी ने कार्यक्रम का परिचय देते हुए बताया कि “वेद हमे शिक्षा देते हैं कि हम सभी एक हैं, हमें एक दूसरे में भेद नहीं करना चाहिए। यहां तक संस्कृत भाषा की बात करें तो कश्मीर संस्कृत के बिना तथा संस्कृत कश्मीर के बिना अधूरी है। “विभाग के शोधछत्र गुरमीत शर्मा तथा ज्योति शर्मा ने सूत्रधार की भूमिका निभाते हुए कार्यक्रम का संचालन किया। अन्त में श्री प्रवीण कुमार ने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया।

