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आईए जानते हैं: 40 लाख लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा हिण्डको के बारे में, जिसको कश्मीरी हुकुमरानों ने हमेशा दबा कर रखा

✍️ Lieutenant. Preeti Mohan

वैसे तो कश्मीर घाटी में कई ऐसे समुदाय निवास कर रहे हैं जिनको कई दशकों से पर्दे के पीछे ही रखा गया था। लेकिन अब यह समुदाय भी अब देश के मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं। और वहां की भाषाएं और संस्कृति से बाकी देशवासी भी ज्ञात हो रहे हैं। 
आईए जानते हैं: 40 लाख लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा हिण्डको के बारे में, जिसको कश्मीरी हुकुमरानों ने हमेशा दबा कर रखा

एक भाषा किसी इलाके यां कबीले की नुमाइंदगी करती है और उसकी पहचान होती है। आज हम एक ऐसी ही भाषा की बात करने जा रहे हैं जो कश्मीर के केरन, करना और कुपवाड़ा के इलाकों की मुख्य भाषा है। इस भाषा का नाम है ‘हिण्डको’। हिण्डको लगपग पांच हज़ार साल पुराणी भाषा है। दुनिया भर में इस भाषा को बोलने और समझने वाले इस समय लगभग 40 लाख लोग हैं। 
हिण्डको शब्द दो शब्दों के सुमेल से बना है। हिंद+कोह, जिसमें हिंद से भाव है कि हिंदुस्तान और ‘कोह’ फारसी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है पहाड़। इसलिए हिण्डको का अर्थ ‘हिंदुस्तान के पहाड़ों की भाषा है’।
कुछ भाषा वैज्ञानिकों के अनुसार हिण्डको पंजाबी की एक पश्चिमी उपभाषा है इसलिए पंजाबी के मातृभाषी बहुत हद तक हिण्डको समझ बोल सकते हैं। यह भाषा भी पंजाबी के समान प्रकृति से बनी है। संस्कृत भाषा के व्याकरणाचार्य पणिनि भी इसी इलाके से संबंध रखते थे।
 
बॉलीवुड के कुछ मशहूर अभिनेता हिण्डको मातृभाषा परिवारों में से है। जैसे, प्राण दिलीप कुमार, राज कपूर और पृथ्वीराज कपूर आदि। 
पर दुखद बात यह रही है कि घाटी में कश्मीरी हुकुमरानों ने इस गैर-कश्मीरी बोली और इसके सभ्याचार (Culture) को हमेशा ही दबा कर रखा था। 
लेकिन अब भारत के पर्यटक हिण्डको भाषा के संगीत और यहां के सभ्याचार को बहुत पसंद कर रहें हैं। इसके अलावा यहां का खान-पान भी पर्यटक के बीच में काफ़ी फ़ेमस हो गया है।  
हैरानी की बात है कि एक ऐसा भी समय था जब कृष्ण गंगा के किनारे बसे केरन में एक भी होटल नहीं था लेकिन अब वहां पर 3000 होमस्टे पर्यटकों के लिए मौजूद है। ओर तो ओर केरन ने तो बॉर्डर टूरिज्म में इस समय गुलमर्ग और पहलगाम को भी पीछे छोड़ दिया है। यह स्वरोज़गार और स्वावलंबन का यह बहुत बड़ा उदाहरण है।
चलो आईए हम भी केरन चलकर यहां की महान संस्कृति और हिण्डको भाषा को समझें और अपने बच्चों को भी अपने देश की बहु-संस्कृति से रूबरू करवाए। 
इसके इलावा कृष्ण गंगा के पवित्र जल को अपने घरों के मंदिरों और अपने मोहल्ले के मंदिरों के लिए लेकर आए और शिवलिंग पर अर्पण कर राष्ट्र और परिवार की सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

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