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गुरेज-कारगिल सड़क को फिर से खोलने से गुरेज घाटी में बढ़ेंगे पर्यटक, स्थानीय लोगों के लिए होगी बड़ी पहल

✍️ Lieutenant. Preeti Mohan

दुनिया भर में जन्नत के नाम से प्रसिद्ध कश्मीर की खूबसूरती के बारे में तो हम सब ने सुना ही होगा। लेकिन जब कोई कश्मीर के खूबसूरत स्थानों के बारे में पूछता है तो सिर्फ श्रीनगर, सोनमार्ग और गुलमर्ग ही ध्यान में आते हैं। लेकिन कश्मीर की असली खूबसूरती तो इसकी वादियों में छुपी पड़ी है, जिनके बारे में अभी धीरे-धीरे देशवासियों को पता लग रहा है। और प्रकृति को प्रेम करने वाले धारा 370 हटाने के बाद से इन वादियों की तरफ लगातार आ रहे हैं। ऐसा ही एक बहुत ही खूबसूरत स्थान छुपा पड़ा है जिसका नाम है गुरेज वैली

गुरेज-कारगिल सड़क को फिर से खोलने से गुरेज घाटी में बढ़ेंगे पर्यटक, स्थानीय लोगों के लिए होगी बड़ी पहल

गुरेज वैली बंदीपोरा जिला में स्थित है और यह श्रीनगर से लगभग 123 किलोमीटर की दूरी पर है। यह सुंदर स्थान जल्द ही आम लोगों के लिए खुलने वाला है क्योंकि प्रशासनिक अधिकारी अब काबोल गली के माध्यम से पारंपरिक गुरेज–कारगिल सड़क खोलने पर विचार कर रहे हैं। 

इस मार्ग के खुलने से गुरेज घाटी में पर्यटकों की संख्या काफी ज्यादा बढ़ जाएगी। घाटी में पहले से ही बहुत सुंदर होटल और होमस्टे बने हुए हैं। इसके अलावा कुछ स्थानीय उद्यमियों ने टेंट में रहने के लिए भी आवास खोले हुए है। 

गुरेज-कारगिल सड़क को फिर से खोलने से गुरेज घाटी में बढ़ेंगे पर्यटक, स्थानीय लोगों के लिए होगी बड़ी पहल

जैसा कि हम जानते हैं कि पिछले काफी समय से भारत सरकार और कश्मीर का स्थानीय प्रशासन कश्मीर में पर्यटकों को और पर्यटक स्थानों को बढ़ावा देने के लिए लगातार तत्पर है। प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क की बहाली से पर्यटकों को क्षेत्र में नए गंतव्य और परिदृश्य के लिए मौका मिलेगा। और उनका कहना है कि यह पारंपरिक व्यापार प्रथाओं को भी पुनर्जीवित करेगा। अधिकारियों का कहना है कि बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन सड़क की मरम्मत के लिए कदम उठा रहा है।

गुरेज वैली समुद्री तल से 8000 फीट की ऊंचाई पर है। और यहां के स्थानीय लोग दर्द शिन आदिवासी जनजाति से संबंधित है और यह लोग अपनी बोली शिना को बहुत पसंद करते हैं। 

गुरेज-कारगिल सड़क को फिर से खोलने से गुरेज घाटी में बढ़ेंगे पर्यटक, स्थानीय लोगों के लिए होगी बड़ी पहल

हब्बा खातून गुरेज वैली का बहुत ही खूबसूरत पहाड़ है। हब्बा खातून एक कश्मीरी कवि थी जो कि अपने पति से बेइंतहा मोहब्बत करते थी। 

इस पहाड़ी के पास ही किशनगंगा नदी बहती है और इस पहाड़ी पर एक वाटरफॉल भी है जिसे हब्बा खातून का चश्मा के नाम से पुकारा जाता है। 

गुरेज वैली का सबसे बड़ा कस्बा दीवार है इस कस्बे को इस गाड़ी का दिल भी कहा जाता है। यह कस्बा 15 छोटे-छोटे गावों को मिलकर बना हुआ। यहां पर आधुनिक समय की वस्तुएं जैसे मोबाइल, एटीएम, पेट्रोल पंप, कपड़े, आदि सब कुछ मिल जाता है।

गुरेज-कारगिल सड़क को फिर से खोलने से गुरेज घाटी में बढ़ेंगे पर्यटक, स्थानीय लोगों के लिए होगी बड़ी पहल

अगर आप यहां पर रिवर राफ्टिंग करना चाहते हैं तो आप किशनगंगा नदी में कर सकते हैं। इसके अलावा आप और भी कई एक्टिविटीज यहां पर कर सकते हैं जैसे कि कैंपिंग।

अन्य स्थान: –

वुलर लेक, रजदान पास, हरमुख, तुलैल आदि।

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