4 मार्च – पुण्यतिथि – लाला हरदयाल सिंह
****लाला हरदयाल****
(4 मार्च,1938 पुण्यतिथि लाला हरदयाल)
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| लाला हरदयाल सिंह |
पंजाब मूल के लाला हरदयाल का जन्म 14 अक्टूबर 1884 को दिल्ली के एक कायस्थ परिवार में हुआ। उनके माता का नाम भोली रानी था और पिता का नाम गौरीदयाल माथुर था जोकि जिला न्यायालय में रीडर का काम करते थे। लाला जी की शादी 17 वर्ष की आयु में हुई। और सन् 1908 में उनके घर एक बेटी ने जन्म लिया। उस समय के क्रांतिकारिओं का झुकाव आर्य समाज की तरफ़ काफी रहता था तो इसलिए लाला हरदियाल जी कम आयु में ही आर्य समाज से जुड़ गए।
प्राथमिक शिक्षा कैम्ब्रिज मिशन स्कूल में करने के पश्चात् लाला जी ने संस्कृत में स्नातक डिग्री (Bachelor of Arts in Sanskrit) सेंट स्टीफेंस कालेज, दिल्ली से पूरी करी। तत्पश्चात् लाहौर में स्थित पंजाब विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ संस्कृत (Master of Arts in Sanskrit) किया । प्रथम श्रेणी में परीक्षा से पास होने के कारण उन्हें सरकार की तरफ से 200 पौण्ड (Pound) की स्कॉलरशिप दी गयी। फिर वह उच्च शिक्षा की प्राप्ति के लिए लन्दन चले गये और 1905 में आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय (University of Oxford ) में दाखला लिया। लाला जी एकाग्रता बहुत अच्छी थी, इस लिए वह एक समय पर कई कार्य कर सकते थे।
बचपन से ही देश की आज़ादी के लिए कुछ कर मिटने का जनून रखने वाले लाला जी क्रन्तिकारी गतिविधिओं के लिए मास्टर अमीरचन्द की गुप्त संस्था के साथ जुड़ गए।
फिर 1907 में एक दिन लाला जी ने आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से तत्काल पढ़ाई को छोड़ दिया और लंदन में ही देश भगत समाज की स्थापना करी और अंग्रजो के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू कर दिया। महात्मा गाँधी जी ने तो लाला जी के बहुत बाद 1920 में शुरू किया था।
लाला जी ने देश की आज़ादी के लिए योजना बनाई कि पहले लोगों में राष्ट्रिय भावना जाग्रत करने के लिए सरकार की आलोचना होनी चाहिए और उसके पश्चात् युद्ध की तैयारी होनी चाहिए। तो ही कोई उच्च परिणाम मिल सकेगा, अन्यथा नहीं। फिर कुछ दिन और वहां पर रहने के पश्चात् वे वापस भारत वापस लौट आये।
वापस भारत आकर लाला जी ने कई बड़े अखबारों के लिए सरकार की आलोचना करने वाले लेख लिखना शुरू किया। जिसके कारण ब्रिटिश सरकार ने उनके ऊपर प्रतिबंध लगा दिया। इसलिए लाला लाजपत राय ने उनको विदेश जाने की सलाह दी।
लाला लाजपत राय की बात मानकर सन 1910 में अमेरिका चले गए। जहां उन्होंने भारत से आये मजदूरों को संगठित करने का काम शुरू किया। और यहीं पर उन्होंने ने ‘गदर’ नामक पत्र निकलना शुरू किया, इसी के आधार पर ‘गदर पार्टी’ की स्थापना हुई थी।
अपने विदेश प्रवास के दौरान लाला जी पेरिस, अल्जीरिया, स्वीडन, इंग्लैंड आदि देशों में गए। लाला जी ने इस प्रवास के दौरान भारतीय मूल के लोगों के दिलों में देशभक्ति की अलख जगाई। उनके भाषण सुनकर सैकड़ो भारतीय और विशेष रूप में सिख वापस भारत आने लगे। इसी कारण ब्रिटिश सरकार ने लाला जी के वापस भारत आने पर प्रतिबन्ध लगा दिया।
इसलिए लाला जी ने इंग्लैंड में रहकर ही अपनी पीएचडी (Ph.D.) की पढ़ाई पूरी करी और उन्होंने बहुत सारी किताबे भी लिखी।
फिर लाला जी वापस अमेरिका चले गए, जहाँ से उन्हें 1938 में वापस भारत आने की आज्ञा मिल गई। लेकिन वापस आने से पहले ही 4 मार्च 1938 में उनकी एक रहस्यमय मौत हो गई। कहा जाता है कि लाला जी को जहर देकर मारा गया था।
