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भगवान राम और सीता जी आते हैं आश्विन मास की पूर्णिमा को घाटी में

✍️ Lieutenant. Preeti Mohan 

दुनिया भर में ऐसे कई प्राचीन हिन्दू मंदिर हैं जिसका इतिहास और आस्था से जुड़ाव काफी गहरा है। अलग-अलग इलाकों में इन मंदिरों से जुड़ी कई तरह की धार्मिक मान्यताएं हैं। ऐसा ही एक मंदिर है कश्मीर का खीर भवानी का मंदिर, जहां पर लोगों की गहरी धार्मिक आस्था है। जो कि जम्मू और कश्मीर के गान्दरबल ज़िले में तुलमुल गाँव में एक पवित्र पानी के चश्मे के ऊपर स्थित है। 

खीर भवानी नाम क्यों पड़ा?

कश्मीरी पंडित दुनिया भर में प्रखर विद्वानों के नाम से जाने जाते थे। दूर-दूर से लोग कश्मीर में धर्म, विज्ञान, अर्थ आदि की विद्या लेने के लिए आते थे। खीर भवानी देवी की पूजा लगभग सभी कश्मीरी हिन्दू और विद्या ग्रहण करने आये लोग करते थे। मंदिर में माता को विशेष रूप से खीर का भोग लगाया जाता है। इसलिए इस मंदिर का नाम खीर भवानी के नाम से प्रसिद्ध हो गया। वसंत ऋतू के मौसम में विशेष तौर पर खीर चढ़ाई जाती है।
भगवान राम और सीता जी आते हैं आश्विन मास की पूर्णिमा को घाटी में

आश्विन मास की पूर्णिमा को क्यों आते है भगवान राम-सीता जी और लक्ष्मण जी?

Maharagyi Pradurbhaav ग्रन्थ के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ है। लंका का राजा रावण, माँ श्यामा देवी की पूजा-अर्चना करता था। लेकिन रावण के तामसिक भोग (नैवेद्य) से माँ श्यामा देवी रावण से रुष्ट (खिन्न) हो गई थी। तो उन्होंने भगवान राम जी से इच्छा प्रकट की कि मैं यहाँ नहीं रहना चाहती। तब श्रीराम जी भगवान हनुमान को आदेश देते हैं वो अपनी पीठ पर मां श्यामा को और उनके साथ 360 नागा को बिठा कर श्रीलंका से कश्मीर ले जाएं। तब से माँ श्यामा देवी गान्दरबल ज़िले में तुलमुल गाँव में निवास करती है। यहाँ पर माँ श्यामा देवी नैवेद्य मिष्ठान को अपनाती है तो ये मंदिर खीर भवानी (क्षीर भवानी) नाम से प्रसिद्ध हो गया। इसी ग्रंथ में यह वर्णित है कि हर अश्वनी माह की अष्टमी को यहाँ मंदोदरी आती है और नवमी को विभीषण आते हैं। उसी आश्विन मास की पूर्णिमा को भगवान राम, लक्ष्मण, जानकी जी यहाँ आते है। यहाँ पर वो मां श्यामा के क्षीर भवानी (खीर भवानी) रूप में प्रदक्षिणा करते हैं और पूजा आराधना करते हैं। यह सिलसिला रामायण काल से चलता आ रहा है। 

खीर भवानी के जलकुंड का रहस्य

माता के इस मंदिर में एक कुंड स्थित है। जिसे बहुत ही चमत्कारी कुंड माना जाता है। कहा जाता है जब भी कश्मीर में कोई बड़ी आफत आने वाली होती है तब इस कुंड के पानी का रंग बदल जाता है। मुसीबत आने पर इस कुंड का पानी काला हो जाता है।

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